*****छत्तीसगढ़ का भौतिक परिदृश्य******
छत्तीसगढ़ राज्य में धरातलीय विषमताएं अधिक मिलती है। छत्तीसगढ़ का आंतरिक भाग सपाट मैदान है तथा इसके चारो ओर सभी दिशाओं में ऊँची उठी भू - स्थलाकृतियां मिलती है। छत्तीसगढ़ को मुख्यतः निम्न चार भौतिक प्रदेशो में विभाजित किया जाता हैं :-
1 . मैदानी प्रदेश
2. पहाड़ी प्रदेश
3. दण्डकारण्य पठार
4. पाट प्रदेश
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***** 1. मैदानी प्रदेश *****
* छत्तीसगढ़ में महानदी के तटीय भाग को मैदानी प्रदेश कहते है। मैदानी प्रदेश के अंतर्गत छत्तीसगढ़ का मैदान ,बस्तर का मैदान , कोटरी का मैदान , कोरबा का मैदान , हसदो का मैदान , रामपुर का मैदान , सरगुजा का मैदान , रिहन्द का मैदान तथा कन्हार का मैदान को सम्मिलित किया गया है। प्रदेश के मैदानों का वर्णन इस प्रकार है :-
***छत्तीसगढ़ मैदान या महानदी बेसिन ***
* छत्तीसगढ़ राज्य में महानदी बेसिन को छत्तीसगढ़ मैदान भी कहा जाता है।
* यह मैदान राज्य के लगभग 50 % भाग में फैला हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल 68 , 064 वर्ग किमी. है।
* इस मैदान का निर्माण कड़प्पा शैल समूह के क्षैतिज अवसादी शैलो पर महानदी तथा सहायक नदियो के अपरदन के फलस्वरूप हुआ है।
* यह मैदान छत्तीसगढ़ राज्य का हृदय स्थल तथा धान का कटोरा भी कहलाता है।
* इस क्षेत्र में औसत वर्षा 125 सेमी. के मध्य होती है।
* यह क्षेत्र लौह - अयस्क , एस्बेस्टस , चूना - पत्थर ,बाक्साइड आदि खनिजों की दृष्टि से अधिक सम्पन्न है।
* यह क्षेत्र कांसा उत्पादन के लिए भी प्रसिद्द है।
* इस क्षेत्र के अंतर्गत रायपुर , दुर्ग , राजनांदगांव , रायगढ़ का सम्पूर्ण भाग एवं बिलासपुर जिले का कुछ भाग सम्मिलित है।
* इस सम्पूर्ण क्षेत्र में लाल - पीली व जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। इस क्षेत्र के तिल्दा व भाटापारा क्षेत्र चावल उद्योग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात है।
* छत्तीसगढ़ का मैदान दो उप - विभागों में विभाजित किया जाता है:-
१. दुर्ग - रायपुर मैदान --दुर्ग -रायपुर मैदान छत्तीसगढ़ मैदान का दक्षिण भाग है। यह भाग शिवनाथ एवं महानदी अपवाह क्षेत्र में आता हैं। इसकी ढाल उत्तर की ओर है। इस न मैदान की आकृति पंखाकार है तथा मैदान का विस्तार रायपुर , बलौदा -बाजार , बेमेतरा , दुर्ग , संजारी , बालोद , राजनांदगांव तथा धमतरी जिलों तक है।
२. बिलासपुर - रायगढ़ मैदान -- छत्तीसगढ़ मैदान के उत्तरी भाग में इस क्षेत्र का विस्तार है। इस मैदान का विस्तार तीन जिलों बिलासपुर , जांजगीर -चाम्पा व रायगढ़ में है।
* शिवनाथ तथा महानदी इसकी दक्षिणी सीमा बनाती है। इसका उत्तरी भाग उच्च भूमि से घिरा हुआ तथा खंडित है। इस मैदान का ढाल मंद एवं दक्षिण की ओर है।
* इस मैदान का सबसे ऊँचा पहाड़ दहला पहाड़ (760 मी. ) है , जो अकलतरा , जांजगीर - चाम्पा में स्थित है। इस मैदान को तीन उप - विभागों से बांटा गया है जो क्रमशः हसदों -मांड का मैदान , बिलासपुर का मैदान व रायगढ़ का मैदान है।
****बस्तर का मैदान ****
* बस्तर का मैदान छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिणी सीमान्त क्षेत्र में है। य गोदावरी तथा उसकी सहायक सबरी नदी का मैदान है।
* इस मैदान का विस्तार सुकमा और बीजापुर जिलों में है। इसकी समुद्रतल से ऊंचाई 150 - 300 मी. के बीच एवं चौड़ाई लगभग 25 किमी. है। इसका निर्माण ग्रेनाइट तथा नीस शैलो से हुआ है।
१. कोटरी का मैदान -- इस मैदान का विस्तार दक्षिण - पश्चिमी सीमान्त क्षेत्र में है , जो कांकेर जिले के पंखाजूर , भानुप्रतापपुर एवं राजनांदगांव जिले के दक्षिणी मोहेला तहसीलों में विस्तृत है।
२. कोरबा का मैदान -- * यह मैदान छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर - मध्य में दक्षिणी कटघोरा एवं दक्षिणी कोरबा तहसीलों में विस्तृत है।
* कोरबा मैदान ( बेसिन ) पश्चिम में पेंड्रा के पठार तथा पूर्व में छुरी पहाड़ियों के बीच स्थित है। यह 200 वर्ग किमी. में फैला है।
३. हसदो -रामपुर का मैदान -- * राज्य के उत्तर में हसदो - रामपुर बेसिन स्थित है। इसके अंतर्गत उत्तरी कटघोरा , पूर्वी पेंड्रा तथा दक्षिणी मनेन्द्रगढ़ सम्मिलित है।
* एकाकी अपरदन अवरोध पहाड़ियां इस मैदान में अनेक स्थानों पर दिखाई देती है। इसमें दक्षिण की मुख्य नदी हसदो है।
* बेसिन के दक्षिण में पेंड्रा पठार एवं छुरी की पहाड़ियां स्थित है , जबकि उत्तर में कोरिया की पहाड़ियां स्थित है।
४. सरगुजा का मैदान --- * सरगुजा बेसिन देवगढ़ तथा मैनपाट -छुरी पहाड़ियों से घिरा है। इसकी औसत ऊंचाई 450 मी. है। इस बेसिन के दक्षिण -पूर्व में मैनपाट , जारंगपाट , सामरीपाट , जशपुरपाट अवस्थित है।
* यह प्रदेश के उत्तर - मध्य क्षेत्र में आता है। इसका विस्तार सरगुजा जिले में अंबिकापुर , दक्षिणी भानुप्रतापपुर और सीतापुर तहसीलों में है।
* इस क्षेत्र में रामगढ़ की पहाड़ी स्थित है।
५. रिहन्द का मैदान --- * यह मैदान राज्य की उत्तरी सीमा पर स्थित है तथा गंगा अपवाह तंत्र का भाग है।
* इसका बेसिन देवगढ़ की पहाड़ियों के ठीक उत्तर तथा कन्हार बेसिन के पश्चिम में अवस्थित है।
* यह वाड्रफनगर , बलरामपुर तक विस्तृत है। इसकी औसत ऊंचाई 300 -450 मी. है। इसे सिंगरौली बेसिन भी कहा जाता है।
६. कन्हार का मैदान --- * यह मैदान राज्य के उत्तर -पूर्वी सीमान्त क्षेत्र में अवस्थित है। यह सरगुजा जिले की रामानुजगंज तहसील में आता है।
***** 2. पहाड़ी प्रदेश ******
( पूर्वी बघेलखंड का पठार )
* बघेल खंड पठार मुख्यरूप से मध्यप्रदेश की उत्तर-पूर्वी सीमा में स्थित है , परन्तु इसका पूर्वी भाग छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत आता है।
* पूर्वी बघेलखण्ड के पठार में बघेलखण्ड पठार का पूर्वी भाग तथा छोटानागपुर पठार का भाग सम्मिलित है।
* यह पठार गंगा एवं महानदी के मध्य जल द्विभाजन का दक्षिणी भाग है।
* इसके अंतर्गत सूरतपुर , कोरिया ,सरगुजा ( मैनपाट व सीतापुर तहसील के अतिरिक्त ) तथा बलरामपुर ( सामरी व कुसमी तहसील के अतिरिक्त ) जिले सम्मिलित है।
* भू - गर्भिक संरचना में विभिन्नता तथा नदियों के अपरदन के फलस्वरूप उच्च भू -भाग अनेक पहाड़ियों एवं श्रेणियों में विभाजित है। जिनका विवरण इस प्रकार है :-
***** मैकाल श्रेणी ******
* इस श्रेणी का विस्तार राजनांदगांव , कवर्धा ,लोरमी एवं पेंड्रा तक है। यह सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का भाग है।
* मैकाल श्रेणी का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है। इसकी औसत ऊँचाई 700 - 900 मी. है।
* बदरगगढ़ चोटी (1176 मी. ) इस श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी है।
* मैकाल श्रेणी के कारण कबीरधाम जिला वृष्टिछाया के अंतर्गत आ जाता है।
* यह श्रेणी शिवनाथ व वेनगंगा नदियों के मध्य विभाजक का कार्य करती है।
****** रामगढ़ की पहाड़ियां ******
* ये पहाड़ियां सरगुजा जिले में स्थित है तथा यह सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का भाग है।
* यहां पर जोगीमारा , लक्ष्मणबेंगरा , सीताबेंगरा नामक गुफाएं है।
* रामगढ़ में ही कालिदास ने मेघदूत की रचना की थी। मेघदूत का अनुवाद छत्तीसगढ़ी भाषा में मुकुटधर पांडेय द्वारा किया गया।
* जोगीमरा गुफा में देवदत्त नर्तक तथा देवदासी नृत्यांगना की प्रेमगाथा का वर्णन है।
****** छुरी - उदयपुर की पहाड़ियां *****
* छुरी - उदयपुर की पहाड़ियां छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर - पूर्वी भाग में कोरबा , सरगुजा , रायगढ़ तक विस्तृत है।
* इनकी औसत ऊंचाई 600 -900 मी. है। मांढ नदी इन्हे उदयपुर की पहाड़ियों से पृथक करती है। ये पहाड़ियां रिहन्द नदी का उद्गम स्थल है।
**** चांगभखार - देवगढ़ की पहाड़ियां ****
* चांगभखार - देवगढ़ की पहाड़ियां राज्य के उत्तरी भाग में स्थित है। यह पूर्वी बघेलखण्ड पठार एवं कैमूर श्रृंखला का भाग है।
* इनका विस्तार जनकपुर ,बैकुंठपुर , मनेन्द्रगढ़ , सूरजपुर , भानुप्रतापपुर , अंबिकापुर , कुमसी , कोरिया एवं रामानुजगंज आदि तहसीलों में है।
* ये शिवनाथ - वेनगंगा के मध्य विभाजक पर्वत का कार्य करती है।
* इनकी ऊंचाई समुद्रतल से 600 -1000 मी. तक है। इन पहाड़ियों में सर्वाधिक ऊँची चोटी देवगढ़ ( 1033 मी. ) है।
* इन पहाड़ियों में बलुआ पत्थर की अधिकता है।
***** 3. दण्डकारण्य पठार *****
* यह पठार राज्य के दक्षिणी भाग में स्थित है। इस पठार का क्षेत्रफल 39060 वर्ग किमी. है।
* राज्य में इस पठार का विस्तार सुकमा , बस्तर , बीजापुर , दंतेवाड़ा , नारायणपुर , कोंडागांव , कांकेर एवं राजनांदगांव ( मोहेला व मानपुर तहसील ) जिलों में है।
* इस पठार की अधिकांश भूमि पर वन फैले हुए है। इसके बस्तर क्षेत्र को साल वनों का द्वीप कहा जाता है।
* इस क्षेत्र में गोंड आदिवासी अधिकता में निवास करते है , इसलिए इसे गोण्डो की भूमि भी कहा जाता है।
* दंडकारण्य पठार में लाल बलुई मृदा पाई जाती है।
* इस क्षेत्र में गढ़िया पहाड़ ( जिला - कांकेर ) स्थित है, जहां पर गढ़िया महोत्सव भी मनाया जाता है।
इस क्षेत्र के प्रमुख पठारों का विवरण इस प्रकार है :-
**** पेंड्रा - लोरमी पठार *****
* पेंड्रा -लोरमी पठार छत्तीसगढ़ प्रदेश के बिलासपुर जिले की लोरमी और मुंगेली तहसीलों तथा कोरबा जिले की पाली तहसील में विस्तृत है।
* मनियारी और अरपा नदी का उद्गम केंद्र यहीं है।
* पलमागढ़ चोटी (1080 मी. ) तथा लाफागढ़ (1048 मी. ) चोटी इस पठार की सर्वोच्च चोटी है। इस पठार की चैतुरगढ़ चोटी को छत्तीसगढ़ का पठार कहा जाता है।
**** धमतरी - महासमुंद पठार *****
* धमतरी - महासमुंद पठार दक्षिण - पूर्वी सीमान्त क्षेत्र ( महानदी बेसिन ) में आता है। यह धमतरी ,कुरुद ,राजिम , महासमुंद , गरियाबन्द , सरायपाली और देवगढ़ तहसीलों में विस्तृत है।
* इसकी औसत ऊंचाई 400 -900 मी. है। इसके पठार की सबसे ऊँची चोटी धारीडोंगर ( 899 मी. ) है।
***** दुर्ग का पठार *****
* दुर्ग पठार पश्चिम की ओर रायपुर उच्च भूमि के समानांतर विस्तृत है। इस पठार का सबसे महत्वपूर्ण धरातलीय स्वरूप डल्ली -राजहरा की पहाड़ियां है। दुर्ग जिले के दक्षिण भाग में इसकी औसत ऊंचाई 700 मी. है।
**** बस्तर का पठार ****
* बस्तर का पठार छत्तीसगढ़ राज्य में दण्डकारण्य के उत्तर -पूर्वी भाग में है। इसका विस्तार मुख्य रूप से बस्तर एवं सुकमा क्षेत्र में है।
* इसकी औसत ऊंचाई 450 -750 मी. है। यह पठार घने वनो से आच्छादित है। खनिज सम्पदा की दृष्टि से यह समृद्ध है।
* यहां लौह - अयस्क , अभ्रक , मैगनीज , बाक्साइड ,चूना -पत्थर आदि खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
*****बैलाडीला पहाड़ी *****
* यह पहाड़ी बस्तर के पठार में दंतेवाड़ा जिले में स्थित है। राज्य की यह पहाड़ी अपने उच्च गुणवत्ता के लौह -अयस्क हेतु प्रसिद्ध है।
* इस पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी नन्दीराज (1210 मी. ) है।
* यह पहाड़ी राज्य के सबसे प्राचीन शैलो में निर्मित है।
***** अबूझमाड़ की पहाड़ियां ****
* अबूझमाड़ की पहाड़ियां छत्तीसगढ़ राज्य में दण्डकारण्य के मध्य पश्चिमी भाग में विस्तृत हैं।
* इनका अधिकांश भाग नारायणपुर जिले के दक्षिण -पश्चिमी भाग में तथा कुछ भाग पंखाजूर ( कांकेर ) , बीजापुर तथा डोगरगांव तक विस्तृत है।
* इन पहाड़ियों की खुरसेल घाटी में सर्वोत्तम किस्म के सागौन वन पाए जाते है।
* छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक वर्षा यहीं पर होती है। इसलिए इन पहाड़ियों को छत्तीसगढ़ का चेरापूँजी भी कहा जाता है।
**** 4. पाट प्रदेश *****
* पाट प्रदेश राज्य क सबसे छोटा भौतिक प्रदेश है। साधारणतः पठारी क्षेत्र के समतल ऊपरी भाग को पाट कहते है।
* यह प्रदेश का राज्य के उत्तर -पूर्व में स्थित है तथा संरचना की दृष्टि से यह छोटानागपुर पठार का ही भाग है।
* यह जशपुर , सरगुजा जिले की सीतापुर एवं मैनपाट तहसील , बलरामपुर की सामरी - कुसमी तहसील तक विस्तृत है।
* इस प्रदेश के अधिकतर भाग में महानदी अपवाह तंत्र का विस्तार है।
* इस प्रदेश में मुख रूप से मानसूनी साल वनो का विस्तार है।
इस क्षेत्र के प्रमुख पाट प्रदेशो का विवरण इस प्रकार है :-
**** मैनपाट *****
* यह सरगुजा जिले के दक्षिण - पूर्वी भाग में स्थित है।
* इसकी समुद्रतल से ऊंचाई 1152 मी. है। इस पर लैटेराइट मृदाएँ तथा कहीं -कहीं दकक्न ट्रैप चट्टानें मिलती है।
* यह छत्तीसगढ़ का सबसे ठंडा स्थल है , इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है। यहां टाइगर पाइंट , इको पाइंट आदि दर्शनीय स्थल है।
* यह मांड नदी का उद्गम स्थल है।
* यहां बाक्साइड खनिज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
* मैनपाट पहाड़ी कोरबा जनजाति के लिए प्रसिद्ध है।
******* जारंगपाट *****
* यह सरगुजा एवं बलरामपुर जिलों में स्थित है। इसकी समुद्रतल से ऊंचाई 1145 मी. है।
* यह राज्य में बाक्साइड का सबसे बड़ा भंडारण क्षेत्र है।
***** सामरीपाट *****
* यह बलरामपुर जिले में स्थित है। इस पाट को मुख्य रूप से दो भागो - जमीर पाट (पूर्वी भाग ) व लहसुन पाट (पश्चिमी भाग ) में बाटा जाता है। जमीरपाट को बाक्साइड का मैदान भी कहा जाता है।
* लहसुन पाट में राज्य की सबसे ऊँची चोटी गौरलाटा (1225 मी. ) स्थित है।
* इस क्षेत्र में कन्हार और मेयोर नदियां प्रवाहित होती है तथा यहां पर कोटरी जलप्रपात स्थित है।
****** जशपुर पाट *****
* ईब तथा मैनी नदियों की समतल , उत्तर की पठारी एवं पाट भूमि को जशपुरपाट कहा जाता है। यह जशपुर जिले में स्थित है।
* यह राज्य का सबसे बड़ा पाट प्रदेश है। इसका क्षेत्रफल 6208 वर्ग कि मी. है।
* यह महानदी के मैदान में ऊपर छोटानागपुर के पठार में मिल जाता है।
* वर्ष 1962 में तिब्बती शरणार्थियों को यहां बसाया गया था।
***** पेण्ड्रापाट ******
* यह पाट प्रदेश जशपुर जिले में स्थित है। इस क्षेत्र से ईब तथा कन्हार नदी का उद्गम होता है।
* इस पाट को छत्तीसगढ़ का बगीचा कहा जाता है।
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