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Sunday, 12 July 2020

छत्तीसगढ़ के प्रतिक चिन्ह , Insignia of chhattisgarh , chhattisgarh ke pratik chinh , cgpsc




छत्तीसगढ़ के प्रतिक चिन्ह

 Insignia  of chhattisgarh







१.     राजकीय पशु  : जंगली भैंस 

       

                छत्तीसगढ़ शासन ने जुलाई ,2001  में राज्य पशु के रूप में दुर्लभ जंगली भैंसो को चुना है।  अंग्रेजी भाषा में इसे ब्यूबेलस तथा ब्यूबेलिस और हिंदी में अरना (नर ) या अरनी (मादा ) कहते है।  जंगली भैंसा  मुख्यतः नेपाल की तराई के घास वनो ,असम में ब्रह्मपुत्र के मैदान ,ओडिसा के कुछ हिस्सों और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में मुख्यतः इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान ,कुरु  वन -क्षेत्र पामेड़ अभ्यारण्य एवं उदंती अभ्यारण्य में पाए जाते है।  

 

 

 

२.    राजकीय वृक्ष   : साल 

 

                     साल छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष है।  इस वृक्ष की पत्तिया 10 -25 सेमी. लम्बी और 5 - 15 सेमी. चौड़ी होती है।  नमी वाले क्षेत्रो में यह सदाबहार है तथा शुष्क क्षेत्रो में पर्णपाती है।  

 

  

३.     राजकीय पक्षी   :  पहाड़ी मैना 

 

                        छत्तीसगढ़ शासन ने जुलाई ,2001  में राज्य पक्षी के रूप में बस्तरिया पहाड़ी मैना को अपनाया ,जिसे  अंग्रेजी में पेनिन्सुलेरिस कहते है।  यह एक नकलची पक्षी है।  यह पक्षी बस्तर में अबूझमाड़ ,छोटे डोंगर ,बेंची ,बारसूर ,पुलचर तिरिया और बैलाडीला गिरि  श्रृंखला आदि तक सीमित है।  इसके पंख काले ,जिसके छोर सफेद होते है ,चोंच गुलाबी तथा पैर पीले होते है।  कांकेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पहाड़ी मैना को संरक्षित किया जा रहा है।  

 

 

४.     राजकीय चिन्ह  

               छत्तीसगढ़ शासन ने 4 सितंबर ,2001 को राज्य का प्रतीक  चिन्ह अपनाया। ऐसा माना जाता है कि छत्तीसगढ़ नाम इस क्षेत्र के 36 गढ़ो अथवा बसहो  की प्रमुख विशेषता के कारण पड़ा।  इन गढ़ो का उल्लेख अनेक बार किलो के रूप में ही हुआ है।  छत्तीसगढ़ की नदियों को रेखांकित करती हुई लहरे भी है।  

 

   

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