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Tuesday, 14 July 2020

छत्तीसगढ़ में वनो का वर्गीकरण Classification of forest in chhattisgarh , vano ka vrgikaran cg , cgpsc

  वनो  का वर्गीकरण  :-

 

 

  """"  छत्तीसगढ़ में प्रजातीय आधार  पर वनो का वर्गीकरण """"

प्रजातीय आधार पर निम्नलिखित तीन प्रकार के वन होते है :-

 

१.    साल  वन 

               *   छत्तीसगढ़ के कुल वन क्षेत्र के लगभग 40 . 56 % भाग पर साल का वन है।  इसके अंतर्गत लगभग एक तिहाई  वन क्षेत्र आते है, एवं इनका विस्तार 125 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्रो में पाया जाता है।  

               *  बस्तर  में साल वृक्ष मुख्य रूप से पाए जाते है ,इसलिए बस्तर को साल वनो का द्वीप भी कहते है।  राज्य सरकार द्वारा साल को राज्य का राजकीय वृक्ष घोषित किया गया है।  

               *  इसका उपयोग  रेल के स्लीपर बनाने में किया जाता है।  

               *  सर्वोत्तम किस्म का साल वृक्ष केशकाल  घाटी में  ( कोण्डागांव )    जाता है।  इसका विस्तार दक्षिण सरगुजा ,गरियाबंद ,राजनांदगांव ,दुर्ग ,कांकेर ,बस्तर ,जशपुर  आदि में है।  

 

 

२.     सागौन  वन 

            *   छत्तीसगढ़ में सागौन के वृक्ष पश्चिमी एवं दक्षिणी भाग में पाए जाते है।  राज्य के लगभग 9 . 42 % भाग पर सागौन वन पाए जाते है।  

            *   ये मुख्यतः राजनांदगांव ,कबीरधाम ,सारगढ़  रेंज  एवं बीजापुर  वन मण्डलो  में मिलते है।   सर्वोत्तम सागौन वृक्ष घुरसेल घाटी ( नारायणपुर ) में पाए जाते है।  

 

 

 

३.   मिश्रित वन 

          

           *  मिश्रित वन छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक  क्षेत्र पर पाए जाते है।  ये राज्य के लगभग 43 . 52 % वन क्षेत्र पर विस्तृत है।  

            *   इनमे साल ,सागौन वृक्ष के अतिरिक्त अन्य पर्णपाती  वृक्ष  तेन्दु ,बीजा ,हल्दू ,सलई, बेर,सेमल ,कुसुम ,पलास ,इमली  आदि प्रमुख है।  

             *    ये वन मुख्यतः  दुर्ग ,उत्तरी  रायपुर, महासमुंद ,सरगढ़ ,जशपुर ,कोरिया आदि वन मंडलो  में मिलते है।  

             *      राज्य में 13  मुख्य वृक्ष प्रजातियो को इमारती  लकड़ी की श्रेणी  में रखा गया है।    

 

 

 

 

      """ छत्तीसगढ़ में  प्राकृतिक /भौगोलिक  आधार  पर वनो का वर्गीकरण"""""""""

 

प्राकृतिक  भौगोलिक आधार पर वनो को  दो प्रकार के वन समूहो  में बाटा गया है:-

 

१.      उष्ण  कटिबन्धीय आर्द्र  पर्णपाती  वन  

                      *  ऐसे  वन उत्तरी एवं दक्षिणी वन वृत्त में पाए जाते है।  इसके अंतर्गत  साल व सागौन  वृक्ष मुख्य रुप  से आते है।  ये राज्य के 47 . 69 % भाग पर विस्तृत है।  

                      *    इसका विस्तार 100 - 150 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्रो में पाया जाता है।  इस प्रकार के वनो से केवल वनोपज की प्राप्ति होती है।  

 

२.      उष्ण कटिबंधीय  शुष्क  पर्णपाती  वन 

                       *   ये वन महानदी बेसिन में पाए जाते है।  इसके अंतर्गत  मिश्रित वन पाए जाते हैं।  ऐसे वन राज्य के लगभग 52 %(51 . 65 %)  भाग  पर 75 -100 सेमी.  वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते है।  

                        *   इन वनो से वनोपज व लकड़ी  दोनों की प्राप्ति होती है।        

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