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Friday, 31 July 2020

छत्तीसगढ़ की खनिज सम्पदा , Minerals of chhattisgarh , cg ki khanij smpada , cgpsc

****छत्तीसगढ़ की खनिज सम्पदा Minerals of chhattisgarh,

                   

 

                                     छत्तीसगढ़ क्षेत्र में मूल्यवान महत्वपूर्ण औद्योगिक खनिज पाए जाते हैं। इन खनिजों के कारण ही भिलाई ,कोरबा।, बैलाडीला क्षेत्र का औद्योगिक विकास संभव हुआ हैं।  खनिजों से प्राप्त राजस्व एवं सकल खनिजों के उत्पादन मूल्य की दृष्टि से इस क्षेत्र द्वारा 46. 9 एवं 44. 5 का योगदान दिया जा रहा हैं।  छत्तीसगढ़ क्षेत्र में लगभग 12 खनिजों का दोहन किया जा रहा हैं।  इसमें सबसे प्रमुख कोयला  है , द्वितीय स्थान पर लौह अयस्क , तृतीय स्थान पर चूना पत्थर एवं चतुर्थ स्थान पर डोलोमाइट खनिज हैं।  

 

म. प्र. के कोयला उत्पादन में 47. 4 ,डोलोमाइट में 70. 1 चूना पत्थर के उत्पादन में 44. 4 तथा बाक्साइड के उत्पादन में 20. 3 सहयोग देने का श्रेय छत्तीसगढ़ क्षेत्र को प्राप्त हैं।  

छत्तीसगढ़ क्षेत्र में उत्पादित हो रहे मुख्य खनिजो के बारे में यहां पर संक्षिप्त जानकारी निम्नानुसार दी जा रही है।  

 

 

 

१.   कोयला 

             कोयला खनिज ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत हैं।  इस अंचल में बिलासपुर ,सरगुजा ,रायगढ़ जिलों में कोयले के भंडार है।  बिलासपुर जिले में प्रमुख कोयला की खदाने कोरबा क्षेत्र में हैं।  सरगुजा जिले में चिरमिरी और विश्रामपुर में कोयला क्षेत्र मुख्य रूप से है।  रायगढ़ जिले के अंतर्गत रायगढ़ का दक्षिणी भाग और मांड नदी के पास प्रमुख कोयला की खदाने हैं।  वर्तमान में इन जिलों में पाए जाने वाले कोयले का उत्पादन मैसर्स साऊथ ईस्टर्न कोल्ड फील्ड लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।  जो की कोल्ड इण्डिया लिमिटेड की इकाई है।  इस क्षेत्र के कोयले का उपयोग प्रमुख रूप से   विधुत संयंत्रो , सीमेंट रिफेक्टरी तथा अन्य उद्योगों में किया जाता है।  

 

 

 

 

२.      लौह अयस्क 

            अंचल के उच्च श्रेणी लौह अयस्क के विशाल भंडार दुर्ग जिले में दल्लीराजहरा की पहाड़ियों तथा बस्तर में बैलाडीला के पहाड़ो में उपलब्ध है। मैमर्स राष्ट्रीय खनिज विकास निगम द्वारा बैलाडीला लौह अयस्क परियोजना बस्तर में संचालित है।  यहां से लौह अयस्क का निर्यात मुख्य रूप से जापान में किया जाता है।  दुर्ग जिले में उपलब्ध लौह अयस्क भंडारो का उपयोग भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा उपयोग में लाया जाता है।  इसके अतिरिक्त बस्तर के रऊघाट परिक्षेत्र तथा राजनांदगांव जिले के बोरियाटिम्बू क्षेत्र में लौह अयस्क के भंडार उपलब्ध होने की संभावना का पता चला है।  

 

 

 

३.     डोलोमाइट 

          उच्च श्रेणी का डोलोमाइट बिलासपुर ,दुर्ग तथा बस्तर क्षेत्र में पाया जाता है।  बिलासपुर जिले के डोलोमाइट का उपयोग भिलाई ,राउरकेला  तथा बोकारो  स्थित लौह एवं इस्पात संयंत्र में किया जाता है।  

 

 

 

 

४.     बाक्साइट

             इस अंचल में बाक्साइट के भंडार बिलासपुर , सरगुजा ,रायगढ़ ,बस्तर तथा राजनांदगांव जिलों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।  बिलासपुर जिले के बाक्साइट का उपयोग कोरबा स्थित भारत एल्युमिनियम द्वारा किया जाता है।  बस्तर जिले के केशकाल क्षेत्र में पाए जाने वाले बाक्साइट का उत्खनन म. प्र. राज्य खनिज निगम द्वारा किया जा रहा है।  

 

 

 

 

 

 

 

५.    सोना 

               छत्तीसगढ़ में ऐसी अनेक नदियां है। जिसके बालू में काफी मात्रा में स्वर्ण कण पाए जाते है।  इसका मुख्य कारण है कि ये नदियां स्वर्ण युक्त चट्टानों को कही न कही काटते हुए गुजरती है और अपने साथ सोने के कण बालू में अपने साथ बहाकर ले जाती है।  इन नदियों में प्रमुख रूप से दुर्ग जिले में आमोर नदी और राजनांदगांव में ईब नदी है।  स्वर्ण के प्राचीन उत्खनन के चिन्ह भी सोना खान क्षेत्र में दृष्टिगत  होते है।  

 

 

 

६.    मैंगनीज 

         बिलासपुर और सरगुजा जिले में तथा बस्तर संभाग में मैंगनीज अयस्क प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।  इसके कई भंडार यहां पर पाए जाते है।  

 

 

 

 

७.   हीरा 

               खनिजों में सबसे बहुमूल्य हीरा 1993 -94 ई. में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अंतर्गत मैनपुर व देवभोग क्षेत्र में पाया जाता है।  यहाँ किंबरलाइट चट्टानों की खोज की गयी।  यहां पांच पाइप मिले है ,जिनमे हीरा और एलेक्जेंडर प्रचुर मात्रा में बतायी गई है।  जगदलपुर में छत्तीसगढ़ का पहला रत्न परिष्करण केंद्र स्थापित किया गया है।  जिसमे रत्नो को तराशने ,पालिश ,कटिंग आदि के कार्यो का प्रशिक्षण दिया जाता हैं। 

 

 

 

 

 

८.   कोरंडम 

        छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कोरंडम अयस्क भी प्रचुर मात्रा है।   हीरे के बाद कोरंडम कठोरता की दृस्टि से श्रेष्ट व मूल्यावान खनिज में इसकी भी गिनती की जाती है।  

 

 

 

 

 

९.   चूने का पत्थर 

         छत्तीसगढ़ परिक्षेत्र में चूने के पत्थर की बहुतायत है।  कड़प्पा युग का चूने का पत्थर बिलासपुर जिले के दर्रा ,अकलतरा ,पिहरी बरसमेरा और मोहगारा में अत्यधिक मात्रा में उपलब्ध है।  जहा इसका उत्खनन किया जाता है।  रायपुर में गैतरा ,सोनाडीह ,झिपन ,करहीडीह और दुर्ग के नंदगाव के निकट खलवा से अर्जुनी तक चूने के विशालतम भण्डारो के विषय में जानकारी उपलब्ध है तथा उस पर उत्खनन कार्य किया जा रहा हैं।  

 

 

 

 

 

 

 

 

१०. अलेक्जेंड्राइट 

      छत्तीसगढ़ परिक्षेत्र में अन्य अयस्क व बहुमूल्य धातुओं की भाति यह बहुमूल्य दुर्लभ पत्थर रायपुर जिले में मैनपुर , देवभोग तहसील में पाए जाते है।  रायपुर क्षेत्र के संदमुड़ा में इसके प्रचुर भंडार उपलब्ध हैं।  

 

 

 

 

 

११.    गेरू 

     गेरू आक्साइड के रूप में पाया जाता है।  यह पीले  व लाल रंग का होता है।  इसमें क्ले की मात्रा अधिक होती है।  सरगुजा , रायगढ़ ,राजनांदगाव जिले में इसके पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।  

 

 

 

 

१२.   तांबे के अयस्क 

           तांबा अपने अयस्क सल्फाइट के रूप छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।  अन्य तांबे के अयस्क कार्बोनेट ,मेकेलाइट ,एजुराईटहै।  जो यहाँ की भूमि में उपलब्ध हैं।  इसके मुख्य भंडारण क्षेत्र बिलासपुर ,राजनांदगांव ,रायगढ़ और बस्तर जिले में स्थित हैं।  

 

 

 

 

 

अन्य खनिज

           

           कोकणम ,स्फटिक ,सिलिका ,एस्बेस्टस ,माइका ,केसीटेराइट,राक ,फास्फेट ,सीसा ,अयस्क ,बेरिल ,अभ्रक ,फ्लोराइट ,सिलीमेनाइट  की भी खदाने छत्तीसगढ़ क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।                                            

        

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