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Sunday, 23 August 2020
छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकगायक ,Main folk singer of chhattisgarh, lok gayak ,cgpsc
****छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकगायक***
छत्तीसगढ़ के प्रमुख गायको का विवरण निम्न प्रकार है :-
*** तीजनबाई ****
* इनका जन्म वर्ष 1956 में पाटन (दुर्ग ) में हुआ था। ये कापालिक शैली की ख्याति प्राप्त पण्डवानी गायिका है। छत्तीसगढ़ की लोककला पण्डवानी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने का श्रेय इन्ही को जाता है। भारत सरकार का पद्मश्री सम्मान , मध्य प्रदेश सरकार का देवी आहिल्याबाई पुरस्कार इनको प्राप्त है।
* ये संगीत नाट्य अकादमी , नई दिल्ली से सम्मानित है। वर्ष 1973 से पण्डवानी गायन का आरम्भ करते हुए तीजनबाई अब तक भारत के बड़े शहरो के साथ फ्रांस , मारिशस , बांग्लादेश , स्विट्जलैंड , जर्मनी , तुर्की , साइप्रस आदि देशो में कार्यक्रम कर चुकी है।
**** कविता वासनिक ****
* इनका जन्म 18 जुलाई ,1962 को राजनांदगांव में हुआ था। ये बैंक कर्मचारी है। ये बचपन से गायन किया करती थी। उन्होंने कार्यक्रमों में गायन एवं अभिनय किया। ये छत्तीसगढ़ी गीतों के सात कैसेट ( रिकार्ड्स ) बना चुकी है।
* ये नाट्य संस्थाओं चंदैनी गोंदा , सोनहा बिहान , कारी आदि से सक्रिय रूप से सम्बद्ध है तथा समय -समय पर विभिन्न सांस्कृतिक मंचो द्वारा सम्मानित है।
**** पी. आर. उराँव ****
* इनका जन्म 6 जनवरी ,1993 को रामगढ़ में हुआ था। ये वर्ष 1979 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा नायब तहसीलदार बने। ये प्रशासनिक कार्य के साथ -साथ लोककला का मंचन किया करते थे।
* पी. आर. उराँव ने रामपुर में 15 कलाकारों की टीम के साथ रामपुर लोककला मंच की स्थापना की। इनके 110 छत्तीसगढ़ी गीतों का संग्रह गुरतुर नाम से प्रकाशित हुआ है। ये अपने गातो का प्रदर्शन मंच पर करते थे।
Saturday, 22 August 2020
छत्तीसगढ़ के लोकगीत, Folk song of chhattisgarh, cg ke lok geet ,cgpsc
****छत्तीसगढ़ के लोकगीत*****
* राज्य के लोकगीतों को मुख्यतः 4 भागो में विभाजित किया गया है :-
१. धर्म व पूजा के गीत
२. पर्व -उत्सव संबंधित गीत
३. संस्कार गीत
४. मनोरंजन गीत
*** धर्म व पूजा के गीत ***
* सेवा गीत ---यह गीत नवरात्रि के समय देवी पूजा पर गाया जाता है।
* जंवारा गीत --- इसे चैत्र नवरात्रि में गाया जाता है और जंवारा निकाला जाता है।
* गौरा गीत --- यह माँ दुर्गा की स्तुति में गाया जाने वाला लोकगीत है , जो नवरात्रि के समय गाया जाता है।
* बैना गीत --- छत्तीसगढ़ में तंत्र साधना से संबंधित गीत है , जो देवी -देवताओं को प्रसन्न करने के लिए गाया जाता है।
* नागमत गीत --- यह नागदेव के गुण -गान व नाग देश में सुरक्षा की प्रार्थना में गाया जाने वाला लोकगीत है ,जो नांगपंचमी के अवसर पर गाया जाता है।
* पंथी गीत --- छत्तीसगढ़ में सतनामी सम्प्रदाय के लोगो द्वारा आध्यात्म महिमा में रचा - बसा प्रसिद्ध नृत्य गीत है। देवदास बंजारे इसके जनक कहे जाते है।
* जस गीत --- यह देव पूजन के अवसर पर गाया जाने वाला गीत है। यह देवी पूजन गीत है।
***** पर्व -उत्सव संबंधित गीत ****
* सुआ गीत --- यह गीत आदिवासी स्त्रियों द्वारा सुआ नृत्य के समय गाया जाने वाला लोकगीत है। इसे गौरी नृत्य गीत भी कहा जाता है। यह गीत दीपावली के पर्व पर शुरू होकर दीपावली के अंतिम दिवस तक चलता है। ये गीत शिव और गौरी के प्रतीक होते है।
* भोजली गीत --- यह गीत रक्षा बंधन के दूसरे दिन भादो माह कृष्ण पक्ष के प्रथम दिन पर गाया जाता है। इस गीत में गंगा का नाम बार - बार आता है।
* राउत गीत --- छत्तीसगढ़ी यादव समाज में दस दिनों तक चलने वाला प्रसिद्ध दिवाली नृत्य गीत है।
* पहकी गीत --- छत्तीसगढ़ में होली के अवसर पर अश्लीलतापूर्ण परिहास में गाया जाने वाला लोकगीत है।
****** संस्कार गीत *****
* पड़ौनी गीत --- यह विवाह के समय हंसी -मजाक को मूल लक्ष्य बनाकर खाने के समय गाया जाने वाला लोकगीत है।
* नचौनी गीत --- नारी की विरह वेदना , संयोग -वियोग के रसो से भरपूर प्रसिद्ध लोकगीत है।
***** मनोरंजन गीत *****
* करमा गीत --- यह गीत करमा नृत्य के समय गाया जाता है। करमा गीत का मुख्य स्वर श्रृंगार है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय लोकगीत है।
* बाँस गीत --- यह दुःख का गीत है , जो राउत जाति द्वारा गाया जाता है। इसमें महाभारत के पात्र कर्ण और मोरध्वज व शीतबसंत का वर्णन होता है। यह नृत्य विहीन लोकगीत है। इसके मुख्य गायक कैजूराम यादव है। इनका वाद्ययंत्र बांस का बना होता है।
* देवार गीत --- यह देवार जाति के लोगो द्वारा घुंघरूयुक्त चिकारा के साथ गाया जाने वाला लोकगीत है।
* ददरिया गीत --- ददरिया गीतों को छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का राजा कहा जाता है। बैगा जनजाति ददरिया नृत्य के समय भी यह गीत गाती है। इन गीतों में सौंदर्य और श्रृंगार की बहुलता होती है। इसे प्रेम गीत के रूप में जाना जाता है। यह गीत सवाल -जवाब पद्धति पर आधारित है। यह प्रणय गीत है।
* लेजा गीत --- यह बस्तर के आदिवासी बहुल क्षेत्रो का लोकगीत है।
* धनकुल / जागर गीत --- यह बस्तर जिले में हल्बा और भतरा जनजाति द्वारा गाया जाने वाला गीत है। इसमें गायन की भाषा हल्बी होती है।
* लोरिक -चन्दौनी गीत --- यह गीत लोरिक और चंदा के प्रेम -प्रसंग पर आधारित गायन है।
* डण्डा गीत --- यह छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रसिद्ध नृत्य गीत है। यह प्रतिवर्ष पूर्णिमा से पूर्व गाया जाता है। इसे शैला नाच भी कहा जाता है।
* भरथरी गीत --- इसमें राजा भरथरी और रानी पिंगला के वैराग्य जीवन का वर्णन किया जाता है। इसकी प्रमुख गायक सुरुजबाई खाण्डे है। इसका वाद्ययंत्र एकतारा एवं सारंगी है। इसके गायन का कथानक श्रवण पर आधारित है। इस लोकगीत को विद्या के रूप में जाना जाता है।
* पण्डवानी गीत ---यह महाभारत कथा का छत्तीसगढ़ी लोकरूप है। यह अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। पण्डवानी के रचयिता सबल सिंह चौहान है।
* रीलो गीत --- यह छत्तीसगढ़ में मुरिया जनजाति द्वारा गाया जाने वाला प्रसिद्ध वैवाहिक गीत है। इसमें पुरुष और महिला बारी -बारी से गाते है।
Friday, 21 August 2020
छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनृत्य , Folk dance of chhattisgarh, chhattisgarh ke pramukh lok nritya ,cgpsc
****छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनृत्य****
* छत्तीसगढ़ में विविधतापूर्ण लोकनृत्यों की प्रवृत्ति मिलती है। यहां का जनजातीय क्षेत्र हमेशा अपने लोकनृत्यों के लिए विश्व प्रसिद्ध रहा है।
* इस क्षेत्र में विभिन्न अवसरों ,पर्वो से संबंधित भिन्न -भिन्न नृत्य प्रचलित है , जिनमे स्त्री -पुरुष समान रूप से भाग लेते है।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख नृत्यों का वर्णन इस प्रकार है :-
**** पंथी नृत्य *****
* यह छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकनृत्य है।
* यह सतनामी पंथियों द्वारा किया जाता है। यह नृत्य माघ पूर्णिमा के दिन जैतखाम की स्थापना पर उसके चारो ओर गायन के साथ किया जाता है।
* पुरुष तथा महिलाओं दोनों के द्वारा यह नृत्य किया जाता है। इसमें प्रयुक्त वाद्ययंत्र मांदर व झांझ है।
* इस नृत्य के प्रमुख कलाकार राज्य के देवदास बंजारे थे।
**** सुआ नृत्य / द - गौरा नृत्य ****
* यह नृत्य देवार जनजाति की महिलाओं द्वारा दीपावली के समय किया जाता है , हालांकि इस नृत्य में जाति बंधन नहीं है।
* इसके अंतर्गत मिट्टी के तोते बनाकर चारो ओर थापड़ी बजाकर नृत्य किया जाता है। यह तोता शिव -पार्वती का प्रतीकात्मक स्वरूप माना जाता है।
* प्रमुख लेखक मुकुटधर पांडेय ने इस नृत्य को छत्तीसगढ़ का गरबा कहा है।
नोट :- द -गौर को द बाइसन हार्न नृत्य ,
द गौरा को सुआ नृत्य
द गौरा -गौरी के गोण्डी नृत्य कहा जाता है।
***** खम्ब स्वांग नृत्य *****
* यह मुख्यतः कोरकू जनजाति द्वारा किया जाता है।
* यह स्वांग मूलरूप से खम्बे के आस -पास किया जाता है। इस स्वांग में खम्ब का तात्पर्य रावण पुत्र मेघनाथ से है।
***** राउत नाचा / राउत नृत्य *****
* यह नृत्य बिलासपुर जिले में दीपावली उत्सव के दौरान किया जाता है। इसे गहिरा नाच के नाम से भी जाना जाता है।
* यह नृत्य मुख्यतः राउत जाति द्वारा किया जाता है
* यह नृत्य भगवान कृष्ण की पूजा के प्रतीक के रूप में किया जाता है। इसमें केवल पुरुष ही भाग लेते है।
* राउत नाचा में दोहे गाए जाते है तथा इसका प्रमुख वाद्ययंत्र गड़वा बाजा है।
***** मांदरी नृत्य ****
* यह नृत्य मुड़िया/मुरिया जनजाति के युवा गृह घोटुल के चारो और घूम -घूमकर किया जाता है। इसमें गीत नहीं गाया जाता है।
* इस नृत्य में पुरुष एवं महिला दोनों भाग लेते है।
* इस नृत्य में पुरुष एवं महिला दोनों भाग लेते है ,दोनों अलग -अलग पंक्तियों में गोला या अर्द्ध गोला बनाकर नृत्य करते है। इसमें पूस कोलंगा नृत्य सिर्फ पुरुष द्वारा किया जाता है।
***** करमा नृत्य *****
* करमा नृत्य गोण्ड , बैगा , उराँव व बिझवार जनजाति का सबसे पुराना लोकनृत्य है।
* यह नृत्य विजयदशमी से प्रारम्भ होकर अगली वर्षा ऋतु के आगमन तक चलता है।
* इसमें पुरुष और स्त्रियां दोनों नृत्य करते है।
* यह नृत्य करमा देवता को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
***** सरहुल नृत्य *****
* यह छत्तीसगढ़ की उराँव जनजाति का प्रसिद्ध लोकनृत्य है। यह सरगुजा क्षेत्र का लोकप्रिय नृत्य है।
* उराँव जनजाति के लोग सरना नामक देवी का निवास साल (सरई ) वृक्ष में मानते है एवं प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा पर साल वृक्ष के चारो ओर घूम -घूमकर उत्साहपूर्वक यह नृत्य करते है।
* उराँव जनजाति की मान्यता है कि इनके देवता साल नामक वृक्ष पर निवास करते है।
* यह नृत्य साल वृक्ष में फूल लगने पर किया जाता है।
***** दशहरा नृत्य ******
* यह बैगा आदिवासियों का नृत्य है। यह नृत्य दशहरा पर्व पर राज्य में प्रारम्भ हुआ था , इसलिए इस नृत्य का नाम दशहरा पड़ा।
****** ढांढल नृत्य *****
* यह नृत्य कोरकू आदिवासियों द्वारा ज्येष्ठ -आषाढ़ की रातो को किया जाता है।
* ढांढल नृत्य के साथ श्रृंगार गीत भी गाए जाते है और नृत्य करते समय लोग एक -दूसरे पर छोटे -छोटे डंडों से प्रहार करते है।
***** गौर नृत्य *****
* यह नृत्य दण्डामी माड़िया जनजातियों में प्रचलित है।
* इसके अंतर्गत गौर ( जंगली भैंस ) या बाइसन के सींग लगाकर नृत्य किया जाता है।
* बस्तर में दशहरा के जात्रा पर्व के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है।
* इस नृत्य में पुरुष व महिला दोनों भाग लेते है।
****** हुल्की पाटा नृत्य *****
* हुल्की पाटा घोटुल का सामूहिक मनोरंजक लोकनृत्य है। इसे अन्य सभी अवसरों पर भी किया जाता है। इसमें लड़कियां व लड़के दोनों भाग लेते है।
* हुल्की पाटा मुड़िया जनजाति के सांसारिक जीवन को अधिक प्रभावित करता है। यह बस्तर संभाग में प्रचलित है।
***** डंडारी नृत्य *****
* यह नृत्य प्रतिवर्ष होली के अवसर पर बस्तर भाग में आयोजित होती है। विशेष रूप से मुरिया -भतरा इस नृत्य में रूचि लेते है।
* नृत्य के प्रथम दिन गांव के बीच चबूतरा बनाकर उस पर एक सेलम स्तम्भ स्थापित किया जाता है और फिर ग्रामवासी उसके चारो ओर घूम -घूमकर नृत्य करते है। बाद में डंडारी नर्तक यात्रा कर गांव -गांव में नृत्य प्रदर्शित करते है।
****** बिलमा नृत्य ******
* बिलमा बैगा और गोण्ड आदिवासियों का लोकप्रिय नृत्य है , जो प्रायः शीत ऋतु में दशहरा के अवसर पर आयोजित होता है। इसमें स्त्री -पुरुष दोनों भाग लेते है।
***** थापती नृत्य ******
* यह नृत्य कोरकुओं का पारम्परिक नृत्य है। यह चैत्र -बैसाख महीने में किया जाता है। इस नृत्य के मुख्य वाद्ययंत्र ढोल और ढोलक है।
* पुरुष व महिला दोनों इस नृत्य में भाग लेते है। इस नृत्य के आरम्भ में कोरकू जनजाति के लोग मेघनाथ खम्भ की स्थापना करते है।
**** परधौनी नृत्य ******
* यह बैगा जनजाति का प्रमुख नृत्य है।
* यह मुख्यतः विवाह के अवसर पर बारात आगमन के समय किया जाता है।
* इस नृत्य में वर पक्ष की ओर से हाथी बनाकर नचाया जाता है।
* इस नृत्य का प्रमुख वाद्ययंत्र नगाड़ा और टिमकी है।
****** दहिकान्दो ******
* राज्य के मैदानी भाग के आदिवासी कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर दहिकान्दो नामक नृत्य का प्रदर्शन करते है। यह करमा और रास का मिला -जुला रूप है।
Thursday, 20 August 2020
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति , Geographical situation of chhattisgarh, chhattisgarh ki bhaugolik sthiti ,cgpsc
****छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति ****
* छत्तीसगढ़ राज्य ऊँची -नीची पर्वत श्रेणियों व घने जंगलो वाला राज्य है जिसका क्षेत्रफल 1. 35 लाख वर्ग किमी. है , जो भारत के क्षेत्रफल का 4. 11 % है। क्षेत्रफल के अनुसार , भारत के राज्यों में इसका स्थान 10 वां स्थान है।
* छत्तीसगढ़ 17 डिग्री 46 ' उत्तरी अक्षांश से 24 डिग्री 05 ' उत्तरी अक्षांश तथा 80 डिग्री 25 ' पूर्वी देशांतर रेखाओं के मध्य स्थित है।
* राज्य की आकृति समुद्री घोड़े ( सी हार्स ) या हिप्पोकैम्पस की आकृति के समान है।
* राज्य की उत्तर से दक्षिण तक लम्बाई 700 -800 किमी. है तथा पूर्व से पश्चिम तक लम्बाई 435 किमी. है। राज्य का उत्तरी जिला बलरामपुर , दक्षिणी जिला सुकमा , पूर्वी जिला जशपुर तथा पश्चिमी जिला बीजापुर है।
* भौतिक विभाजन के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा है।
* यह राज्य मध्य प्रदेश के दक्षिण -पूर्व में स्थित है।
* छत्तीसगढ़ मैदान की ढाल पूर्व दिशा की ओर है।
* कर्क रेखा राज्य के उत्तरी भाग के 3 जिलों कोरिया , सूरजपुर और बलरामपुर से गुजरती है।
* भारतीय मानक समय रेखा राज्य के 7 जिलों बलरामपुर ,सरगुजा ,सूरजपुर, कोरबा , जांजगीर -चांपा , बलौदाबाजार , तथा महासमुंद से होकर गुजरती है।
* भारतीय मानक समय रेखा तथा कर्क रेखा राज्य के सूरजपुर जिले में एक - दूसरे को काटती है।
* छत्तीसगढ़ एक भू -आवेष्टिक प्रदेश है। अर्थात इस राज्य की सीमा किसी भी समुद्रतट से नहीं लगती तथा इसकी सीमा किसी अन्य देश की सीमा को भी स्पर्श नहीं करती।
* राज्य के उत्तर पूर्वी भाग में कोरिया , सरगुजा तथा जशपुर जिलों में पर्वतमालाओं एवं पठारों का विस्तार है।
* राज्य के पूर्वी भाग में सक्ति पर्वत महानदी कछार तक तथा पश्चिमी छोर छोटानागपुर ( रायगढ़ जिला ) तक विस्तृत है।
छत्तीसगढ़ का सीमा विस्तार ****
* छत्तीसगढ़ 7 राज्यों के साथ सीमा बनता है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश , उत्तर -पूर्व में झारखण्ड , उत्तर -पश्चिम में मध्यप्रदेश ,दक्षिण में आंध्रप्रदेश , पूर्व में ओड़िशा, दक्षिण में महाराष्ट्र एवं दक्षिण पश्चिम में तेलंगाना राज्य स्थित है।
* इन राज्यों की सीमा को स्पर्श करने वाले छत्तीसगढ़ के जिलों का विवरण इस प्रकार है :-
* उत्तर -प्रदेश (1 जिला )- बलरामपुर
* मध्य प्रदेश (7 जिले ) - बलरामपुर , सूरजपुर ,कोरिया ,बिलासपुर , मुंगेली , कवर्धा , राजनांदगांव
* झारखण्ड (2 जिले ) -बलरामपुर , जशपुर
* आंध्रप्रदेश (1 जिला )- सुकमा
* तेलंगाना ( 2 जिला ) -बीजापुर , सुकमा
* ओडिशा (8 जिले ) राज्य की सबसे लम्बी सीमा को छूने वाला राज्य --जशपुर , रायगढ़ , महासमुंद , धमतरी , गरियाबंद , बस्तर , सुकमा , कोंडागांव
* महाराष्ट्र (4 जिले ) -राजनांदगांव , नारायणपुर ,बीजापुर , कांकेर
* 3 राज्यों के साथ सीमा -----बनाने वाले जिले बलरामपुर व सुकमा है। बलरामपुर जिले की सीमा उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश और झारखण्ड है। तथा सुकमा जिले की सीमा आंध्रप्रदेश , तेलंगाना और ओडिशा को स्पर्श करती है।
* 2 राज्यों के साथ सीमा ------ बनाने वाले जिले जशपुर , राजनांदगांव तथा बीजापुर है। जशपुर जिले की सीमा झारखण्ड एवं ओडिशा को स्पर्श करती है। राजनांदगांव जिले की सीमा मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को स्पर्श करती है। बीजापुर जिले की सीमा तेलंगाना एवं महाराष्ट्र को स्पर्श करती है।
* छत्तीसगढ़ राज्य के 9 जिले ऐसे है जिनकी सीमा किसी भी राज्य को स्पर्श नहीं करती। ये निम्न प्रकार है :-
सरगुजा
रायपुर
कोरबा
जांजगीर -चांपा
दुर्ग
बेमेतरा
बालोद
दंतेवाड़ा
बलौदा बाजार
* छत्तीसगढ़ का धमतरी सबसे कम अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला है तथा बलरामपुर सबसे अधिक अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला है।
* राज्य का सबसे उत्तरी जिला - बलरामपुर , दक्षिणी जिला- सुकमा , पूर्वी जिला - जशपुर , पश्चिमी जिला - बीजापुर है।
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