***छत्तीसगढ़ ग्रामीण एवं किसानों से संबंधित योजनाएं***
ग्रामीण एवं किसानों से संबंधित योजनाओं का विवरण निम्न है :-
* राजीव किसान मितान योजना ---किसानों को खाद , बीज , तकनीकी उपकरण , ज्ञान एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए इस योजना को वर्ष 2017 में प्रारम्भ किया गया है।
* मुख्यमंत्री श्रमिक अन्न सहायता योजना ---यह योजना राज्य में वर्ष 2017 में प्रारम्भ की गई थी। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य राज्य के असंगठित क्षेत्रो में पंजीकृत मजदूरों को मुफ्त में भोजन प्रदान करना था।
* सौर सुजला योजना --- इस योजना का आरम्भ नवंबर , 2016 में रायपुर में किया गया था। इस योजना के तहत किसानो को काफी कम कीमत पर सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पम्प प्रदान किए जाते है।
* मौसम आधारित फसल बीमा योजना ---यह योजना वर्ष 2014 से राज्य के समस्त जिलों में संचालित है। इस योजना का उद्देश्य मौसम आधारित फसलों के लिए कृषको को बीमा लाभ देना है।
* आदर्श ग्राम योजना --- यह योजना वर्ष 2014 में प्रारम्भ की गयी थी। राज्य सरकार ने रंजना , दुगाली , इचकेला , कुल्हाड़ी घाट , कठगोड़ी एवं ओरछा को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है।
* मोचो बाड़ी योजना --- किसानों को जैविक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए दंतेवाड़ा जिले में यह योजना वर्ष 2014 से चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत किसानों को हरी - सब्जियों की खेती तथा धान की उत्तम खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
* कृषक ज्योति योजना --- यह योजना वर्ष 2009 में प्रारम्भ की गई थी। इस योजना का उद्देश्य 5 एचपी तक के सिंचाई पम्पो को बिजली प्रदान करना है। इसके तहत किसानो को अब 3 से 5 एचपी के लिए 200 रु. प्रतिमाह देने होंगे। इसके अंतर्गत किसानो को 5 एचपी तक के पम्प पर 75 % का अनुदान दिया जाता है। 5 से अधिक एचपी क्षमता वाले पम्प के उपयोग पर 300 रु. प्रति एचपी का भुगतान करना होगा।
* इंदिरा गाँव गंगा योजना --- 19 नवंबर , 2000 से प्रारम्भ इस योजना का लक्ष्य प्रदेश के सभी विद्युतीकृत ग्रामो में कम - से -कम एक समन्वित जलस्त्रोत का संचालन करना है।
* सामुदायिक निवेश कोष --- राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत सामुदायिक निवेश कोष का प्रावधान स्व - सहायता समूहों के जीविकोपार्जन संबंधी गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए प्रारम्भिक पूँजी के रूप में किया गया है। इसके अंतर्गत स्व - सहायता समूहों को सूक्ष्म ऋण योजना 50 -70 हजार रु. तक की राशि ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
* अन्न बैंक योजना --- यह योजना समस्त ग्राम पंचायतों में लागू की गयी है। इसके तहत निर्धन , अशक्त तथा बेसहारा लोगो को अन्न बैंक से अनाज उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना सबसे पहले दुर्ग जिले में लागू की गई थी।
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