Saturday, 4 July 2020

छत्तीसगढ़ में आवागमन (सड़क मार्ग )

छत्तीसगढ़ में आवागमन (सड़क मार्ग )

 Transportation in chattisgarh (road rout)

 

 

 

 

छत्तीसगढ़ में सड़को से संबंधित की समस्याएं आज भी बनी हुई है।  अधिकांश क्षेत्रो में सड़के संकरी है।  जिन पर गाड़ियों का सुरक्षित निकल पाना मुश्किल होता है।  लोक निर्माण विभाग के पूर्वी परिक्षेत्र द्वारा अंचल में सड़क निर्माण कार्य किये जाते है।  छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्य रूप से तीन राष्ट्रीय राजमार्ग है - 

 

 

1.   राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक  6    

          यह मार्ग पूर्व दिशा में उड़ीसा राज्य की सीमा से प्रारंभ होकर सरायपाली ,पिथौरा ,आरंग ,रायपुर ,भिलाई ,दुर्ग ,राजनांदगांव एवं चिचौला होते हुए बाघ नदी महाराष्ट्र राज्य की सीमा तक है।  

 

 

 

2.    राष्ट्रीय राजमार्ग  क्रमांक  43 

             यह रायपुर ,जगदलपुर ,विजयनगर मार्ग के नाम से जाना जाता है।  जो रायपुर से प्रारम्भ होकर धमतरी ,कांकेर ,कोंडागांव एवं जगदलपुर होते हुए धनपूंजी ग्राम पर समाप्त होता है।  

 

3.   राष्ट्रीय राजमार्ग  क्रमांक  16 

               यह मार्ग इंद्रावती नदी भोपालपटट्नम से प्रारम्भ होकर बीजापुर ,गीदम ,जगदलपुर होते हुए गोरियाबहार पुल ,जगदलपुर में समाप्त हो जाता है।  

 

राष्ट्रीय राजमार्ग   16 पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग 36 के नाम से जाना जाता था।  भारत सरकार परिवहन मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक   २०-०२ -1989  के द्वारा इसे राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक  16 घोषित किया गया।  

 

 

 

 

         राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण एवं रख -रखाव  का कार्य भूतल परिवहन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आबंटित राशि से किया जाता है।  छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गो के रखरखाव व अन्य   कार्यो के लिए दिसंबर 1972 में राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल रायपुर की स्थापना की गई है।       

 

 

Friday, 3 July 2020

छत्तीसगढ़ में आवगमन के साधन (रेल मार्ग ) Transportation in chhattisgarh (train route ) , cg , cgpsc

छत्तीसगढ़ में आवगमन के साधन  (रेल मार्ग ) 

Transportation in chhattisgarh (train route )

आंकणो के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में 2225 किमी. लम्बाई का राष्ट्रिय राज मार्ग 3213 किमी. का राज्य मार्ग , तथा 4814 किमी. लम्बाई का जिला मार्ग है।  राज्य के सबसे छोटे राज मार्ग की लम्बाई 65 किमी. है।  छत्तीसगढ़  राज्य का प्रथम रेल खंड नागपुर -  राजनांदगांव की स्थापना 1888 को हुई थी।  प्रदेश में पहली बार रेल नागपुर से राजनांदगांव चली थी।  छत्तीसगढ़ में 119 रेलवे स्टेशन है।  

 

     रेलमार्ग 

                  छत्तीसगढ़ की रेलवे लाइन दक्षिण -पूर्व रेलवे के अंतर्गत है।  दक्षिण - पूर्वी रेलवे के अंतर्गत रायपुर ,बिलासपुर ,रायगढ़ तथा दुर्ग छत्तीसगढ़ क्षेत्र के प्रमुख स्टेशनो में आते हैं।  इन सभी प्रमुख स्टेशनो से कम्प्यूटरीकृत आरक्षण की सुविधा उपलब्ध है।  छत्तीसगढ़ राज्य के निम्न एक्सप्रेस  गाड़ियां प्रारम्भ होती है।  

जो निम्नानुसार है: -

 

 

१. छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस    -  बिलासपुर से अमृतसर 

 

२.  अमरकंटक एक्सप्रेस   - दुर्ग से भोपाल 

 

३.  महानदी एक्सप्रेस   - बिलासपुर से भोपाल 

 

४.  बिलासपुर-कोचीन  एक्सप्रेस  - बिलासपुर से नागपुर होकर        कोचीन त्रिवेंद्रम 

 

 ५.  नर्मदा  एक्सप्रेस  - बिलासपुर से इंदौर 

 

६.  सारनाथ एक्सप्रेस   - दुर्ग से छपरा 

 

७.  लिंक एक्सप्रेस  - कोरबा से रायपुर होकर विशाखापट्नम 

 

८.   गोंड़वाना एक्सप्रेस   - बिलासपुर से हजरत निज़ामुद्दीन 

 

९.   राजधानी एक्सप्रेस - बिलासपुर से नई दिल्ली 

 

 

 

 

 

छत्तीसगढ़ राज्य से होकर गुजरने वाली प्रमुख मेल -एक्सप्रेस  गाड़ियों के नाम निन्मलिखित है:-

 

१.   उत्कल एक्सपेस  -पूरी से हजरत निज़ामुद्दीन ,बिलासपुर और कटनी बीना होकर।  

 

२.   संबलपुर एक्सप्रेस  - संबलपुर से हजरत निज़ामुद्दीन ,बिलासपुर और कटनी -बीना होकर।  


३.  समता  एक्सप्रेस  - विशाखापट्न्नम से दिल्ली 

 

४.  हावड़ा -मुंबई  मेल  - हावड़ा से मुंबई 

 

५.   हावड़ा - मुंबई एक्सप्रेस - हावड़ा से मुंबई सुपरफास्ट 

 

६.  हावड़ा - कुरला  एक्सप्रेस  - हावड़ा से कुरला

 

७.  हावड़ा -अहमदाबाद एक्सप्रेस  -  हावड़ा से अहमदाबाद 

 

८.  पूरी एक्सप्रेस - पूरी से अहमदाबाद 

 

९.  ज्ञानेश्वरी सु. डि.  एक्सप्रेस  - हावड़ा से कुरला 

 

१०.  आजाद हिन्द एक्सप्रेस  - हावड़ा से पूना 

 

 

    

Thursday, 2 July 2020

छत्तीसगढ़ के प्रमुख उद्योग , Company of chhattisgarh , chhattisgarh ke uddhog


छत्तीसगढ़ के प्रमुख उद्योग Company of chhattisgarh 

 

 १.  बीड़ी उद्योग 

          छत्तीसगढ़ में बीड़ी बनाने की व्यवसाय में विगत 60  वर्षो से कई संस्थान कार्यरत है।  कुटीर उद्योग के रूप में व्यवसायी कच्चा माल  लेकर ठेके में बीड़ी बनवाते है।  बीड़ी बनाने हेतु तम्बाखू की आपूर्ति अंचल के अतिरिक्त महाराष्ट्र ,गुजरात व कर्नाटक से होती है।  इस उद्योग में लगभग 10000 श्रमिक परिवारों को रोजगार प्राप्त होता है इन सभी जगहों पर औसतन 1. 25 करोड़ बीड़ियो का उत्पादन प्रतिदिन होता है।  

 

                                       

        

   

२.   कत्था उद्योग 

           कत्थे का उपयोग पान मसाले के रूप में पुरे हिंदुस्तान में होता है।  इसका उत्पादन खैर वृक्ष के द्वारा होता है।  छत्तीसगढ़ में सरगुजा जिले के वनो में खैर वृक्ष बहुतायत में उपलब्ध है।  जिनके द्वारा कत्थे का उत्पादन होता है।  इसके लिए वुड प्रोडक्ट नामक कम्पनी द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है। यह कम्पनी प्रति वर्ष लगभग 350 क्विन्टल  कत्थे का उत्पादन करती है। सरकार द्वारा इसे खैर वृक्ष लीज पर दिए गए है।  



 

 

  

 

 

 

३.   जूट उद्योग 

          छत्तीसगढ़ में स्थित रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाली मोहन जूट मिल इस अंचल एवं छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण इकाई है।  जिसका निर्माण 1935 में किया गया था।  यहाँ पर जूट के बैग व अन्य जूट सम्बन्धित सामग्री का उत्पादन होता है।  इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 40 टन प्रतिदिन है।  इस संयंत्र में करीब 1400 लोग कार्यरत है।  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

४.   प्लास्टिक उद्योग 

           राजधानी रायपुर में ही इसके कई औद्योगिक इकाई स्थापित है। छत्तीसगढ़ का प्लास्टिक उद्योग करीब 15 करोड़ का व्यवसाय करता है।  इसमें लगभग 2000 श्रमिक परिवार  संलग्न है।  प्लास्टिक का उपयोग दैनिक जरूरतों की चीजों में होने के कारण बढ़ता ही जा रहा है।  प्लास्टिक फर्नीचर ,प्लेट ,ग्लास ,बाल्टी खिलौने ,पालीथीन  बैग आदि दैनिक जरूरत की चीजों का माध्यम बनता चला जा रहा है।   

 

 

 

 

 

५.    राईस मिल 

             छत्तीसगढ़ में धान  की पैदावार बहुतायत होती है।  यहाँ की प्रमुख उपज भी धान है,इस कारण इसे धान का कटोरा भी कहते है।  इस क्षेत्र में धान की पैदावार होने के कारण यहाँ राईस मिलो की संख्या भी ज्यादा है।  पूरे छत्तीसगढ़ में  करीब 406 राईस मिले है ,जिनमे केवल रायपुर जिले में ही 267 राईस मिल संयंत्र स्थित है।  इनमे से 27 सहकारी संस्थाओ के द्वारा संचालित की जा रही है, शेष को प्राइवेट सेक्टर के द्वारा संचालित किया जा रहा है।  सबसे कम राईस मिल सरगुजा क्षेत्र में स्थित है।  इन समस्त राईस मिलो के द्वारा करीब 15000 -20000 लोगो को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे है। 

 

 

 

 

६.      चक्का उद्योग 

            तकनीकी विकास के साथ साथ हर उद्योग में अपना स्वरूप बदला है।  फलतः कुटीर उद्योगो का केन्द्रीयकरण समाप्त होता जा रहा है।  किन्तु रायपुर में बैलगाड़ी के चक्के बनाने के उद्योग आज भी कार्यरत है।  तथा केंद्रीयकृत उद्योग के रूप में स्थापित है।  भारत कृषि प्रधान देश है।  गावो में हमारी पुरानी परम्परा के अनुसार आज भी ट्रेक्टर के अलावा अधिकांश खेती छोटे किशान बैल एवं गाड़ी के द्वारा ही करते है।  

 

 

 

 

 

७.   लाख उद्योग 

         यह उद्योग धमतरी जिले में कच्चे मॉल की उत्पादकता के कारण फल फूल रहा है।  छत्तीसगढ़ के शहर धमतरी के निकट स्थित जंगलो में स्थित विशेष प्रकार के पेड़ो की शाखाओ में एकत्रित हुए गोंद  जैसे पदार्थ को खरीदा जाता है।  फिर ऐसे रसायनो से परिष्कृत कर  लाख के टुकड़ो  व महीन पावडर में बदलकर उपयोग हेतु तैयार किया जाता है।  

 

 

 

 

 

८.   सीमेंट उद्योग 

         छत्तीसगढ़ में सीमेंट उद्योग  जड़े काफी नीचे तक पहुंच चुकी है। क्योकि इस क्षेत्र में अत्यधिक मात्रा में चूने के पत्थर की उपलब्धता है।  इस कारण  सीमेंट उद्योग के क्षेत्र में विकाश हुआ।  सबसे पहले सीमेंट का कारखाना 1965 में जामुल में स्थापित किया गया।  यहाँ का उत्पाद A.C.C. के नाम से है।  इसके अलावा रायपुर व रायगढ़ के       मध्य कई सीमेंट कारखाने सीमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया ने स्थापित किये है।  आज इस अंचल में 9 सीमेंट के वृहद संयंत्र लगातार कार्य कर रहे है।  छत्तीसगढ़ क्षेत्र में स्थित सभी अधिकतर विश्व प्रसिद्ध कम्पनिया है ,जो सीमेंट का उत्पादन करती है।  

 



 

           

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